नाम जपने का परिणाम

नमस्कार मित्रो मेरा नाम हैं, शशांक भारद्वाज और आपका हमारे ब्लॉग Hindi Gyan Blogger में स्वागत है। आज हम आपको महत्वपूर्ण लेख के बारे में बताएंगे, जिसको पढ़कर आपको ज्ञान की प्राप्ति होगी

एक गाँव में एक वृद्ध स्त्री रहती थीं, उसका कोई नहीं था। वो गोबर के उपले बना कर बेचती थी और उसी से अपना गुजारा चलाती थीं। वह कृष्ण जी की भक्त थीं, 

उठते बैठते वह कृष्ण नाम का जाप किया करती थीं ओर यही उस स्त्री की विशेषता थी। यहाँ तक उपले बनाते समय उस गाँव के कुछ दुष्ट लोग, उस की भक्ति का उपहास करते थे।

 एक बार उन दुष्टों ने रात को उस वृद्ध स्त्री के सारे उपले चुरा लिए और आपस में कहने लगे कि अब देखेंगे कि कृष्ण जी कैसे इसकी सहयता करते हैं। सुबह जब वह उठीं तो वह क्या देखती है? कि उसके सारे उपले किसी ने चुरा लिए है, वे मन ही मन हंसने लगी और अपने कान्हा को कहने लगीं। 

“पहले माखन चुराता था और मटकी फोड़ कर गोपियों को सताता था, अब इस बुढ़िया के उपले छुपा कर मुझे सताता है। ठीक है! जैसी तेरी इच्छा” यह कह उसने अगले दिन के लिए उपले बनाना आरंभ कर दिये। दोपहर हो गयी तो उसे भूख लग गयी, पर घर में कुछ खाने को ही ना था सिर्फ दो गुड की डलीयां थीं।

 अतः एक गुड की डली अपने मुह में डाल कर, उसने उपर से पानी के कुछ घूंट पी लीये ओर वह लेटने चली गयी। भगवान तो भक्त वत्सल होते हैं, अतः अपने भक्त को कष्ट मे देख कर वह विचलित हो ही जाते हैं। उन से उस वृद्ध साधिका के कष्ट सहन नहीं हो पाया, 

उन्होंने सोचा उस की सहायता करने से पहले उस की परीक्षा ले लेता हूँ। अतः वे एक साधू का वेश धारण करके, उस के घर पहुँच गये और कुछ खाने को मांगने लगे। वृद्ध स्त्री को अपने घर आए एक साधू को देख कर अंनद तो आया, पर घर में कुछ खाने को ना होने से उसे दुख भी हुआ। 

फिर उसने गुड की इकलौती डली उस साधु बाबा को, शीतल जल के साथ खाने को दे दी। साधु बाबा भी उस स्त्री के इस त्याग को देख कर प्रसन्न हो गए और जब वृद्ध स्त्री ने बाबा को अपना सारा वृतांत सुनाया। तो बाबा उसे सहायता का आश्वासन दे कर चले गए और गाँव के सरपंच के यहाँ पहुंच गये।

 उन्होने सरपंच से कहा, “सुना है! इस गाँव के बाहर जो वृद्ध स्त्री रहती है उस के उपले किसी ने चुरा लिए है। मेरे पास एक सिद्धि है, यदि गाँव के सभी लोग अपने उपले ले आयें तो मैं अपनी सिद्धि के बल पर उस वृद्ध स्त्री के सारे उपले अलग कर दूंगा।” सरपंच एक भला व्यक्ति था, इस लिए उसे भी वृद्ध स्त्री के उपले चोरी होने का दुख था। 

अतः उन्होने साधू बाबा रूपी कृष्ण की बात तुरंत मान ली और गाँव में ढिंढोरा पिटवा दिया। कि सब गांव के लोग अपने घर के उपलो को, तुरंत गाँव की चौपाल पर लाकर रखें। जिन दुष्ट लोगों ने चोरी की थी, उन्होंने भी उस वृद्ध स्त्री के उपले अपने उपलों में मिला कर उस ढेर में एकत्रित कर दिये। उन्हें लगा कि सब उपले तो एक जैसे होते हैं, किसी को क्या पता लगेगा ओर साधू बाबा कैसे पहचान पाएंगे।

 दुर्जनों को ईश्वर की लीला और शक्ति दोनों पर ही विश्वास नहीं होता, वेशधारी साधू कृष्ण ने सब उपलों को कान लगाकर वृद्ध स्त्री के उपले अलग कर दिये।

वृद्ध स्त्री अपने उपलों को तुरंत पहचान गयी और उसकी प्रसन्नता का कोई ठिकाना ही नहीं था। वो अपने उपलो को उठा कर साधू बाबा को नमस्कार करती हुई वहां से चली गयी। जिन दुष्टों ने वृद्ध स्त्री के उपले चुराए थे,

 उन्हें यह समझ में नहीं आया कि बाबा ने कान लगा कर उन उपलों को कैसे पहचाना। अतः जब बाबा गाँव से कुछ दूर निकल आये, तो वे दुष्ट भी बाबा से इसका कारण जानने पहुंचे। बाबा ने सरलता से कहा कि, “वृद्ध स्त्री हर समय ईश्वर के नाम का जाप करती थी।

 और उस के नाम में इतनी आसथा थी, कि वह उपुलों में भी चला गया। कान लगाकर वे यह सुन रहे थे, कि किन उपलों से कृष्ण का नाम निकलता है। और जिन से कृष्ण का नाम निकल रहा था, उन्होने उन्हे उन सब उपलो से अलग कर दिया।

 इस कहानी से हमें सीखना है, कि कैसे हम उस प्रभु पर भरोसा करके उस को हर समय याद कर सकते हैं। इस कहानी में एक छोटा सा दृष्टांत दिया है, कि अगर हम मालिक पर भरोसा कर के हम उस एक को हर समय याद करते हैं। 

तो हमारे सारे कार्य सफल हो जाते हैं, सोचिए अगर हम ऐसे ही मालिक को याद करते हुए उसका सिमरन करके उसे याद करते हुए नाम का जाप करेंगे। 

हम समय पर भजन सुमिरन करते रहेंगे तो, हमें उसके घर पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता। और हम एक दिन उसकी भक्ति करते हुए, उस कुल मालिक के घर पहुंच कर उसके साथ मिलाप हासिल कर सकते हैं। 

इस कहानी से हमें शिक्षा लेते हुए, तन मन से कुल मालिक को याद करना है ओर भजन सुमिरन करना है। वह कुल मालिक हमारी फरियाद ओर पुकार एक ना एक दिन जरूर सुनेगा और वह हमें अपने साथ अपने सच्चे निज घर जरूर लेकर जाएगा। यह है नाम जपने का परिणाम,

 अतः हमे भी व्यवहार के प्रत्येक कृत्य करते समय नाम का जाप करना चाहिए। हमे हर समय सिमरन करते रहना चाहिए, ताकि हमारा और परमात्मा का संपर्क बना रहे। 

हमें जो भी कार्य करना है, उस परमात्मा को स्मरण करते हुए करना है। और पूरी श्रद्धा रखनी है अपने मन में ईश्वर के प्रति। इस से हमारे उपर ईश्वर कि कृपा बनी रहेगी और हमारा संकट से भी बचाव होता रहेगा।

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